फिल्मों के रि रिलीज कल्चर में जुड़ी कुछ नई फिल्में
रि रिलीज़ कल्चर में जुड़ गई रहना है तेरे दिल में, वीर ज़ारा और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फ़िल्में
रहना है तेरे दिल में, वीर ज़ारा और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्मों को पुनः रिलीज़ किया गया है, जिससे ये फिल्में इन दिनों फिर से चर्चा में आ गई हैं।
सोशल मीडिया पर इन दिनों बॉलीवुड फिल्मों की रि रिलीज़ को काफी सराहना मिल रही है। रील्स वायरल हो रही हैं, जिसमें फैंस अपनी पसंदीदा फिल्मों की री रिलीज़ को लेकर बेहद खुश नजर आ रहे हैं। बीते दिनों रॉकस्टार, लैला मजनू, बाज़ीगर जैसी फिल्में फिर से रिलीज़ की गईं और दर्शकों ने उन्हें बेहद अच्छा रिस्पांस दिया। लैला मजनू ने लगभग 8 करोड़ का मुनाफा भी कमाया। बता दें कि पहले इनमें से कई फिल्में उतना अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाईं, लेकिन रि रिलीज़ कल्चर के चलते इन्होंने अपनी फिल्मों से अच्छा पैसा कमा लिया है।
रि रिलीज़ कल्चर नया नहीं है
जैसा कि इन दिनों ट्विटर, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफार्म पर देखने को मिल रहा है कि जनता अलग-अलग फिल्मों की डिमांड कर रही है और उन्हें रि रिलीज़ करवाने में लगी है, लेकिन यह रि रिलीज़ कल्चर बॉलीवुड के लिए नया नहीं है। 70 और 80 के दशक में भी यह चलन था जब मदर इंडिया, शोले और दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे जैसी फिल्मों को रि रिलीज़ किया गया था। इनमें से कुछ फिल्में आज भी कई जगहों पर लगाई जाती हैं। तमिल फिल्म जगत में भी रि रिलीज़ कल्चर चलता रहता है, जिसकी वजह से वहां भी फिल्मों की महत्ता दर्शकों में बनी रहती है।
नितिन दातार, जो प्रेसिडेंट ऑफ सिनेमा ऑनर हैं, ने पीटीआई (प्रेस ट्रस्ट इंडिया) से बात करते हुए बताया कि -
पिछले दिनों रि रिलीज़ हो रही फिल्मों को अच्छी प्रतिक्रिया मिली है, जिससे उन फिल्मों को उद्योगिक फायदा हुआ है। इससे दर्शकों को पुनः अपनी पसंदीदा फिल्में देखने में खुशी महसूस होती है और उन्हें आमतौर पर अच्छा रिस्पांस मिलता है।
अब देखना यह है कि रहना है तेरे दिल में और गैंग्स ऑफ वासेपुर जैसी फिल्में रि रिलीज़ से कितने दर्शकों को अपनी ओर खींच पाएंगी।
रहना है तेरे दिल में तमिल फिल्म मिन्नाले की रीमेक थी, जिसके संगीत, स्टोरी और कास्टिंग ने दर्शकों को अपनी ओर खींचा। गैंग्स ऑफ वासेपुर 2012 में आई फिल्म थी, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी, पंकज त्रिपाठी, पियूष मिश्रा, रिचा चड्ढा जैसे दिग्गज कलाकार थे और इसे अनुराग कश्यप ने डायरेक्ट किया था।
देखना यह है कि यह रि रिलीज़ फिल्मों का सिस्टम कितनी दूर जाता है और इससे सिनेमा जगत में लोगों और दर्शकों को क्या देखने को मिलता है।
~युवराज कटारिया
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